ये लम्हा थम जाए

तुझमें ये बस जाए

इश्क मेरा तुझसे शुरु

और तुझही पे खत्म हो जाए॥

मेरे सभी जज़बातों की

मेरे सभी ख्यालों की

रब्ब करे कुछ ऐसा 

कि मेरी हर आरज़ू पूरी हो जाए

तू मुझसे रूबरू हो जाए

तेरे कदमों में मेरा जहाऩ समा जाए॥

जो तेरी राह 

मेरी राह से अलग हो जाए

ख़ुदा करे या तो ये अफ़वाह हो

या मेरी जान निकल जाए॥

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॥लम्हा॥
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