सर्दियों के इस मौसम में सुबह उठकर

जब मैं अपने घर की खिड़की से बाहर देखता हूँ

चारों ओर बिछी सफेदी की चादर मैं देखता हूँ

लोगों के चहरों पर

अलग सी इक खुशी मैं देखता हूँ।

सर्दियों के इस मौसम में सुबह उठकर

जब मैं अपने घर की खिड़की से बाहर देखता हूँ

इक जदिद सवेरा मैं देखता हूँ

उन हवाओं में 

इक अलग सा एहसास ईहस़ास करता हूँ।

सर्दियों के इस मौसम में सुबह उठकर

जब मैं अपने घर की खिड़की से बाहर देखता हूँ

उस रयीहात हुल्वा को जज़्ब करके

मैं फ़िर इक बार यह सोचता हूँ

कि  काश़ गर तू होती मेरे साथ

तो इस तक़्स में

उस ख़ुशी को ऐत़रफ़ करता मैं बार बार।

सर्दियों के इस मौसम में सुबह उठकर

जब मैं अपने घर की खिड़की से बाहर देखता हूँ

ले आती हैं वो ठण्डी हवाएँ जो बारिश की बूँदें

उन्हें अपने जिस्म़ पे मैं यशूअर करता हूँ

और ख़ुद को मैं इक अलग ही जहाऩ में देखता हूँ

और ख़ुद को मैं

इक अलग ही जहाऩ में देखता हूँ।


Photo Credits: Sundeepkullu.com

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।।मौसम।।
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