उसके सिवा मेरा कोई नहीं

ये बात मैं उसे समझाता रहा

लड़ती भी वो थी

रूठती भी वही

मैं हाथ जोड़ जोड़ उसे मनाता रहा

पता नहीं कैसे वो भूल गयी मुझे

जिसे उस ख़ुदा से ज़्यादा मैं चाहता रहा।

अब पता लगा मुझे

कि वो तो मेरे नसीब में ही ना थी

और मैं यूँ ही उसे पाने के लिए

दर दर दुआएँ माँगता रहा।

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॥तक़दीर॥
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