औरतों का दर्जा ऊँचा होता है

औरतों का औधा ऊँचा होता है
बिन औरतों के तो
हमारा घर सूना सूना सा होता है।
घर एक पूजा है
जिसका आशीर्वाद वे हैं।
घर एक कहानी है
जिसकी साहित्यकार वे हैं।
घर वो सदी है
जिसकी जवानी वे हैं।
घर वो रुह है
जिसकी रुहदारी वे हैं।

उनके बिना तो सिर्फ़ एक मकान है
जिसकी छत एक
और दीवारें चार हैं।
उनसे बनता है वो घर
जहाँ खिलखिलाती हैं खुशियाँ
जहाँ बहती हैं हँसी की नदीयाँ
और सूर्य की किरणें आती हैं करने उजागर
एक सवेरा नया।
वे कारण हैं हमारे अस्तित्व का
वे कारण हैं हमारी सफलता का
जिस घर में होती हैं औरतें
उस घर में ही होता है वास माँ लक्ष्मी और माँ दुर्गा का।

कन्याओं का करते हम पूजन हैं
तो बाकी दिन कहाँ चले जाते हैं वो संस्कार
जब करते हैं हम उनका अपमान
और उनके ऊपर अत्याचार।
मत सोच कि तू इनके बिना जी लेगा
तू यह सोच
कि तूझे करते देख निरादर इनका
तेरा रब्ब तेरे बारे में क्या सोचता होगा।
जिस औरत की कोख़ से लिया जन्म तूने
तू अब उसे ही मारना चाह रहा है
क्या इतना बड़ा हो गया है तू
कि अपने रब्ब के बाणों से बाण लड़ा रहा है।
क्या यही है सीखा तूने?
अपने लड़कों को तू खिला रहा है
और लड़कियों को खून के आँसू रुला रहा है।
तू इन पर कर भरोसा
ये ते सम्मान बढाएँगी
और तू इन्हे पराया धन कहता है
जो आज हैं, कल चली जाएँगी।

इस तरह से संभाल इन्हें
इस कदर तू इन्सें पाल
कि तेरा लड़का गलत ना सीखे तुझसे
और ना करे कोई ऐसा काम
जिससे तेरा सर झुक जाए शर्मिंदगी से
और मच जाए तेरे जीवन में बवाल।
सच कहता हूँ, ऐ बन्दे
ध्यान से सुन
वक्त आ गया है
कि अब तू बदल
और जहाँ ख़ड़ा है
वहाँ से मुड़।
अब तू अपनी सोच में परिवर्तन ला
और मेरी ये बात, अपने दिल में बिठा
इनपे अब तू भरोसा कर
इन्हें करने दे जो ये चाहती हैं
और यकीन कर
ये तेरे लिए दुआएँ ही लाएँगी
और तेरा हर ज़ख्म
तेरा हर दुःख
ये हँसते हँसते झर जाएँगी।

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॥ औरत ॥
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