जिसका शेर सा था हौंसला 

जिसकी हाथियों सी थी चाल

मौत भी डरती थी मिलाने को नज़रें जिसके साथ

वो वीर था

वो शेर था

वो शहीद-ए-आज़म भगत सिंह था

उसके जैसा सूरमा

न किसी माँ ने कभी जनमा

न कभी जनमेगी कोई माँ

ये आज़ादी उससे है

ये देश उससे है

फिर क्यों भूल गये उसकी शहादत को

क्यों करते हो याद सिर्फ़ नेहरू और गाँधी बापू को?

उसकी वीरता को सलाम करो

उसकी शहादत को प्रणाम करो

चढ गया फाँसी जो तुम्हारे लिए हँसते हँसते

उसे भी तुम कभी याद करो

उसे भी तुम कभी याद करो।।

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।।आज़ादी।।
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Sadah

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