ये जो मज़हब के नाम पर तुम लड़ते हो

कभी पूछा है क्या तुमने उस चाँद को

कि उसका मज़हब क्या है?

ये करवाचौथ पर भी पूजा जाता है

ईद पर भी इसका सजदा किया जाता है

ये आसमां में भी आफ़ताब फैलाता है

इस जहाऩ में रौशनी भी ये लाता है

और मुख पर इतने दाग़ होने के बावजूद भी

बेदाग़ कहलाता है।

ईद पर ये महताब बनकर आता है

करवाचौथ पर ये चाँद बन जाता है

पर दोनो मज़हबों में 

पूजा यही जाता है।

चाहे आधा हो या पूरा हो

इसके बिना ना ईद हो

करवाचौथ भी अधूरा हो।

किस मज़हब के लिए तुम लड़ते हो?

क्यों धर्म के नाम पर बँटते हो?

इसको देखे बिना, ना हिंदू के हलक़ से निवाला उतरे

न मुसलमान कभी पूरा हो।

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।। महताब ।।
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Sadah

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