मैं तो बैठा कुछ सोच रहा था

दुनिया के रंग देख रहा था

डूबा अपने ख्यालों में

इक अलग जहाऩ संजो रहा था।

उन्हें मेरे एक तरफ अमीरी खड़ी दिख रही थी

दूसरी तरफ उन्हें गरीबी झुकी दिख रही थी

ना जाने क्यूं उन लोगों के लिए ये नज़ारा अजब था

मुझे तो दोनों ही तरफ ममता दिख रही थी।

मेरे दोनों तरफ लड़कियाँ थी

दोनों ही गज़ब हस्तियाँ थी

दोनों की आँखों में कुछ नया जानने की वही इच्छा थी

अपने माँ बाप के लिए दोनों ही हूर पारियाँ थी।

दोनों के चेहरों की चमक अलग थी

दोनों की आवाज़ों की रूहानियत अजब थी

मेरे लिए तो दोनों ही 

उस खुदा की बनाई हसीन मूरत थी।

मैं तो बैठा कुछ सोच रहा था

दुनिया के रंग देख रहा था

डूबा अपने ख्यालों में

इक अलग ही जहान संजो रहा था।

मैंने तो चाहा था दोनों को मिलाना

एक अल्लाह और एक ऊँ को जोड़कर एकोंकार बनाना

लेकिन

ना चाहते हुए भी मैं उन दोनों के बीच की सरहद बन गया

मैंने ना अमीरी को इस तरफ आने दिया

ना गरीबी को उठकर उस तरफ जाने दिया

मैंने ना चाहते हुए भी उन दोनों को बांट दिया।

क्या कहूंगा जाकर उस भगवान को मैं

क्या मुंह दिखाऊंगा उस अल्लाह को

भेजा था जो पूरी करने उसने मुझे

मैं अधूरी छोड़ आया हूं उसकी उस तमन्ना को…?

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।।तमन्ना।।
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Sadah

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Totally unprofessional; Trying to figure out what writing is all about; I am just a name.


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