अधूरापन

मैं आज भी खुद से पहले तेरे लिए सोचता हूं

 मैं आज भी साँस से ज़्यादा तुझको ज़रूरी मानता हूं

 मैंने तो इश्क़ किया है
और इसे वफा से मैं निभाऊंगा 

तू चाहे बेवफाई क्यूं ना करले

 मैं तो सिर्फ तुझे ही चाहूंगा 

माना कि तुझे मुझसे प्यार ना था 

पर हमारे बीच इक रिश्ता दोस्ती का तो था

 तो कैसे तूने इतनी आसानी से कह दिया कि अब हम अनजान हैं? 

कैसे तूने इतनी आसानी से मुझे भूला दिया?

 गलती तेरी थी या मेरी, पता नहीं 

तूने जो कहा

मैंने वो किया

तेरे लिए अपना प्यार भी भुलाया

 तुझे अपना अच्छा दोस्त भी बनाया

 अपनी सभी बुरी आदतों को भी छोड़ा 

और सिर्फ वहीं किया जो तूने चाहा 

अब किसको बताऊं मैं दुख अपने 

किसको सुनाऊं ये अधूरे सपने

 ये जो तीर आकर सीने में चुभ रहे हैं

 किसको समझाऊं की कितना दर्द दे रहे हैं

 मैं भूल कर भी तुझको भूल नहीं पा रहा

 ऐसा जादू तूने मुखपर है किया 

मुझे कुछ समझ नहीं आ रहा

मैं सवाल भी खुद से पूछ रहा हूं

और जवाब भी खुद ही दिए जा रहा।

13 comments

  1. I loved this poem. It captures the true essence of what love is all about – spoken and expressed in ways that one can appreciate. Unfortunately, a lot of us waste very precious time in letting our loved ones know how precious they are to us. And oftimes, the moment passes us by and we live with a regret that never goes away.

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