“इश्क”, ‘एकतरफा वाला’

“इश्क की दुनिया में महफूज सा हो गया हूँ,

इस दुनिया की चकाचौंध में मशगूल सा हो गया हूँ,

खुदा ना खास्ता मुलाकात हो गई तन्हाई से,

फीके फीके लफ्जों से बयां किया इश्क उसने।”   _____(1)

“सुबह का सच होने वाला सपना समझ बैठा तुझे,

पर तू तो खुद एक हकीकत निकली।

तेरे लिए सितारों से रोशनी चुराने चला था मैं,

पर तू तो खुद चाँद की चाँदनी निकली।”          ____(2)

“तेरी वादियों में तेरी खुशबू से बेवजह इकरार कर रहा हूँ,

तेरी गलियों में नजरें झुकाकर बेवजह चक्कर काट रहा हूँ,

अपना या बेगाना करना तेरे हाथों में छोडकर,

दिल को हथेली पर लेकर बेसब्री से तेरा इन्तजार कर रहा हूँ।”             _____________(3)

“धड़कनों का मिजाज समझ नहीं आता है,

तुझसे मिलकर सब कुछ बदला-बदला सा नजर आता है,

धुंधले से आसमां में तेरी तस्वीर नजर आने लगी है,

वो टूटा तारा बिना कुछ कहे ही सबकुछ देकर चला जाता है।”    ______________(4)

“खामोशिया भी बस तेरा ही जिक्र कर रही हैं आजकल,

रातों की तन्हाईयाँ भी तेरी ही बातें कर रही हैं आजकल,

मन्दिर की घण्टियों में तूझे ही सुन रहा हूँ आजकल,

पाँचों पहर की नमाजों में तेरी ही इबादत कर रहा हूँ आजकल।”     ___________(5)

“तुझे देखने की खता फिर से करना चाहती हैं मेरी घायल नजरें,

तेरे इन्तजार में फिर से टकटकी लगाना चाहती हैं मेरी नाजुक पलकें,

शाम और सुबह बस तेरा ही रस्ता तक रहीं हैं ये भीगी आँखें,
आठों पहर बस तेरी ही बातें करना चाहता है मेरा टूटा दिल।”_______(6)

“सूखे सावन में भीग रहा हूँ,

धूप में खड़ा सूख रहा हूँ,

नींद में भी जग रहा हूँ,

जिन्दा होकर भी मर रहा हूँ।” _________(7)

“बस यही तो इश्क है, एकतरफा वाला।”

©ReemaPrabhat

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