“साँस से साँस मिले, या ना मिले,

रूह से रूह मिलाने की चाहत है मुझे।

मन से मन मिले या ना मिले,

दिल से दिल मिलाने की चाहत है मुझे।”

“वो पास आयें, और मेरे जिस्म की खुशबू को छू जायें,

वो दूर जायें, तो अपने साथ मेरे दिल को भी ले जायें।

जब तक होश रहता है, उनके ख्यालों में डूबा रहता हूँ,

तन्हाईयों की बेहोशी में, उनकी यादों में खोया रहता हूँ।”

“एक अजीब सी दूरी है, हम दोनों की रूहों के बीच,

उन्हें भी पता है मैं यहीं हूँ, मुझे भी पता है वो यहीं है।

सारा जहाँ साजिशें कर रहा है, मेरे और उनके बारे में,

दिल तो पागल था ही, अब दिमाग भी बहक रहा है।”

“पहली-पहली बार आग लगने लगी है इस दिल में,

पता नहीं ये इश्क है, या फिर उनसे मिलने के झूठे बहाने।

मेरा कम्बख्त इश्क इस कदर उन्हें परेशान करेगा, मुझे मालूम ना था,

पता नहीं मन्जिल मिलेगी भी या नहीं, उन्हें मेरी पहचान होगी भी या नहीं।”

“गाने-कविताएं नहीं, अपनी बेपरवाह बातें लिख रहा हूँ,

इस झूठे जमाने, सच्चे इश्क से बेपरवाह होकर।

पता नहीं उन्हें कैसा लगेगा, मेरी बेपरवाही को पढ़कर,

सारा जमाना तो चुराने लगा है मेरी अच्छी-अच्छी लाइनों को।”

©ReemaPrabhat

Follow us:
“बेपरवाह बातें”
Share:

Post navigation


6 thoughts on ““बेपरवाह बातें”

  1. सारा जमाना तो चुराने लगा है मेरी अच्छी-अच्छी लाइनों को।”
    kash aap ek shabd bhi chura lete….! bahut khub.

Leave a Reply

Your email address will not be published.