“ये सर्दियों का मौसम, और बाहर हो रही हल्की-हल्की बर्फबारी;

तेरी यादें दिलाये, मुझे बहुत सताये।

बिन आँसू रुलाये, और फिर ये बताये;

तेरे बिना मैं खाली सा हूँ।”

“ये ढ़ाबे पर बिक रही कुल्हड़ वाली चाय, और रेडियो पर बज रहा किशोर कुमार का गाना;

बस तेरी यादों के सहारे जिये जा रहा हूँ, कुछ बचा ही नहीं सब कुछ है वीराना।

ये सर्द हवायें, मेरे कानों के पास आयें, और फिर ये सनसनायें;

तेरे बिना मैं मर सा चुका हूँ।”

“ये सरसों के हरे-पीले खेत, और घास पर पड़ रही ओस की बूँदें;

चाँदनी रात में भी अँधेरा है, अब तो अपनी परछाई ने भी साथ छोड़ा है।

भोर होते ही मेरे बाग की चिड़िया, मेरे आँगन में आये, और ये गाना गाये;

तेरे बिना मैं अधूरा सा हूँ।”

“ये ठण्ड़ की दोपहर वाली गुनगुनी धूप, और उसके बाद बे-मौसम की बारिश;

मेरी छत से जो पानी टपक रहा है, मेज पर रखे पुराने अखबारों को गीला कर रहा है।

ये बार-बार मुझे भरी नींद से जगाये, और चुपके से टिपटिपाये;

तेरे बिना मैं तन्हा सा हूँ।”

©ReemaPrabhat

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तेरे बिना मैं?
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