“मेरी आँखों में हैं अंगारे,

जो देखना चाहें कुछ नजारे।

कुछ ऐसे हसीन नजारे,

जिनमें हों चाँद और सितारे।


मुझे काली रातों से है प्यार,

उगता सूरज देखने की आदत नहीं।

रात में सोना, लगता जहर जैसा,

सोते हुए सपने देखना, अपनी चाहत नहीं।


खुली आँखों से देखता सपने,

उनको पूरा करने को रहता बेकरार।

मैं तो कुछ भी नहीं करता,

ये सब है, माँ का आशीर्वाद।


हाँ, ये उन दोस्तों का प्यार है,

जो हैं, जान से भी ज्यादा प्यारे।

रहते हैं, मेरे दिल के करीब,

हैं काफी ज्यादा दुलारे।


मेरी आँखों में हैं अंगारे,

जो देखना चाहें कुछ नजारे।

कुछ ऐसे हसीन नजारे,

जिनमें हों चाँद और सितारे।”

©ReemaPrabhat

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