अरमानों के मकान की छत नहीं होती…

“वह तो जैसे एक गहरा कुआं है जो देह ख़तम कर दे पर कभी न भरे”

फरमानों के लफ़्ज़ों की ज़ुबान नहीं होती…

“वह तो बस लिख दिए जाते हैं जो ज़मीर भी कुचल दें पर कभी न मिटे”

खुली आंखों से कोई किताब नहीं होती

“वह तो जन्मों का हिसाब लिए बैठे हैं जो धूल की चादरों से लद जाए पर ख्वाब कभी ना टूटे”

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अरमान
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Saiman

Saiman


life is not to feel regret n nighter to explain ur self...its just about to prove urself so that finders can reach up to u...no need to go behind d others..😊


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