इतिहास का फड़क्ता वो पन्ना हो तुम,
जो कभी पूरी ना हो सके, वो तमन्ना हो तुम।
रगों में बेहते लहू का वो कतरा हो तुम,
सिमटे तो पास, बहे तो नाश, वो खतरा हो तुम।
देह में सिमटती आग हो तुम
चलती रहे तो सांस, वरना मेरी राख हो तुम।
तन पे लिपटा हुआ वो लिबाज़ हो तुम
ढका तो लाज, हटा तो मेहेज़ रिवाज़ हो तुम।
इतिहास थे, इतिहास हो, और शायद इतिहास ही रहोगे तुम
न पास थे, न आस थे, अब काश ही रहोगे तुम।

Follow us:
इतिहास हो तुम।
Share:
Saiman

Saiman


life is not to feel regret n nighter to explain ur self...its just about to prove urself so that finders can reach up to u...no need to go behind d others..😊


Post navigation


Leave a Reply

Your email address will not be published.