यूं तो दुनिया में लोगों की तहज़ीब बेहिसाब है
फिर भी क्यों हर घर का अपना ही हिसाब है
कहीं पे नारी बेनकाब है, तो कहीं पे हिजाब है।

अपने घरों पर चाहते ये पर्दे आम हैं
वहीं सड़कों पर करते किसी को बेआब्रू हर श्याम हैं।

कैसे किसी को समझाएं, रे पापी, ये भी तो किसी के घर की शान है,
यह भी किसी की मां, किसी की पत्नी, किसी की बहन है
वही रिश्ता आम है
जिसे तू अपने घर में बचाता, बनाता, हर दिन करता सलाम है।

औरत ही क्यों हर गुनाह को झेलने वाली खान है?
क्या वो साहूकारों का बनाया कोई मकान है?

जिसके रखवाले तो बनकर आते हैं कई
क्या उसे भी लगता है ये सब सही?
किसी ने पूछा कभी, अरमान तो होंगे उसके भी कई।

क्यों रात का अंधेरा महिलाओं के लिए ही खौफनाक है?
क्यों ना निकलें रातों को यार, उनके भी तो अरमान हैं।

ऐसी कौनसी तिलस्मी ताकत है रे मानव रात के साए में?
कि महिला के सीने में खौफ है, और मिला उसे अब्ला का नाम है।

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रात के अंधेरे में महिलाओं के लिए निकालना क्यों खौफनाक है?
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Saiman

Saiman


life is not to feel regret n nighter to explain ur self...its just about to prove urself so that finders can reach up to u...no need to go behind d others..😊


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One thought on “रात के अंधेरे में महिलाओं के लिए निकालना क्यों खौफनाक है?

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