।।आईना।।

मैंने तो सिर्फ एक आईना बनना चाहा था, मुझे क्या पता था कि ये दुनिया  मेरे टूटने पर मुझे काँच ही समझ बैठेगी! आखिर एक आईना भी तो काँच तभी बनता है जब उसे तोड़ा जाए! क्यों भला कोई खुद

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