।।आईना।।

मैंने तो सिर्फ एक आईना बनना चाहा था, मुझे क्या पता था कि ये दुनिया  मेरे टूटने पर मुझे काँच ही समझ बैठेगी! आखिर एक आईना भी तो काँच तभी बनता है जब उसे तोड़ा जाए! क्यों भला कोई खुद

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अधूरापन

मैं आज भी खुद से पहले तेरे लिए सोचता हूं  मैं आज भी साँस से ज़्यादा तुझको ज़रूरी मानता हूं  मैंने तो इश्क़ किया है और इसे वफा से मैं निभाऊंगा  तू चाहे बेवफाई क्यूं ना करले  मैं तो सिर्फ

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