रात के अंधेरे में महिलाओं के लिए निकालना क्यों खौफनाक है?

यूं तो दुनिया में लोगों की तहज़ीब बेहिसाब है फिर भी क्यों हर घर का अपना ही हिसाब है कहीं पे नारी बेनकाब है, तो कहीं पे हिजाब है। अपने घरों पर चाहते ये पर्दे आम हैं वहीं सड़कों पर

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 रहस्यमयी कहानियां:- कौन थी वो बर्फीली रात मे मिली महिला?

ह ये उन दिनों की बात है जब हम एचपीयू में पढ़ते थे। 80 का दशक था। मैं ऐवलॉज हॉस्टल में रहा करता था और कुछ दोस्त हिमकिरीट में रहा करते थे। तो हम कभी रिवोली जाया करते तो कभी

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।।तमन्ना।।

मैं तो बैठा कुछ सोच रहा था दुनिया के रंग देख रहा था डूबा अपने ख्यालों में इक अलग जहाऩ संजो रहा था। उन्हें मेरे एक तरफ अमीरी खड़ी दिख रही थी दूसरी तरफ उन्हें गरीबी झुकी दिख रही थी

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पहले की तरह।

पिछले कुछ सालों में  बहुत बदल गयी है ज़िंदगी और इस ज़िंदगी के साथ  बदल गयी है तू भी पहले तू हँसती थी मुस्कुराती थी और गाती भी थी।।। तू अब भी हँसती है लेकिन वो हँसी अब कुछ दबी

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।।हिंद।।

आज उन वीरों को याद करो उन देशभक्तों की पुकार सुनो शौर्य को अपने तुम जगाओ भारत को अपने तुम सजाओ रक्शक बनकर इस आज़ादी के अपने देश के गौरव को तुम बढाओ राष्ट्रगीत गाओ तिरंगा लहराओ आज़ादी के इस

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।।आज़ादी।।

जिसका शेर सा था हौंसला  जिसकी हाथियों सी थी चाल मौत भी डरती थी मिलाने को नज़रें जिसके साथ वो वीर था वो शेर था वो शहीद-ए-आज़म भगत सिंह था उसके जैसा सूरमा न किसी माँ ने कभी जनमा न

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