इतिहास हो तुम।

इतिहास का फड़क्ता वो पन्ना हो तुम, जो कभी पूरी ना हो सके, वो तमन्ना हो तुम। रगों में बेहते लहू का वो कतरा हो तुम, सिमटे तो पास, बहे तो नाश, वो खतरा हो तुम। देह में सिमटती आग

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भाई

जिसने ज़िन्दगी के हर इक मोड़ पर मेरा साथ दिया वो कोई और नहीं मेरा भाई था जो करता रहा मेरी परवाह खुद की फ़िक्र किए बिना वो कोई और नहीं मेरा भाई था जो हर समय मेरे बारे सोचता

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