“इश्क”, ‘एकतरफा वाला’

“इश्क की दुनिया में महफूज सा हो गया हूँ, इस दुनिया की चकाचौंध में मशगूल सा हो गया हूँ, खुदा ना खास्ता मुलाकात हो गई तन्हाई से, फीके फीके लफ्जों से बयां किया इश्क उसने।”   _____(1) “सुबह का सच होने

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उन्हें कैसे भूलूँ मैं?

“जिसकी थाली में बिना खाये आज भी भूँख नहीं मिटती, जिसकी लोरी सुने बिना आज भी नींद नहीं आती। जिसकी दुवाओं के बिना, आज भी घर से नहीं निकलता, जिसकी मन्त्रों वाली फूँक से, आज भी बडा से बडा दर्द

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