प्यार

मैं रेत बनूंगा, तुम दरिया बं जाना, मुझे छू कर आगे चले जाना। मैं रात बनूंगा, तुम उस रात की चांदनी बन जाना, अपनी चांदनी से मुझे रोशन कर जाना, मैं सूरज बनूंगा, तुम उस सूरज की किरणे ब बन

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अरमान

अरमानों के मकान की छत नहीं होती… “वह तो जैसे एक गहरा कुआं है जो देह ख़तम कर दे पर कभी न भरे” फरमानों के लफ़्ज़ों की ज़ुबान नहीं होती… “वह तो बस लिख दिए जाते हैं जो ज़मीर भी

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इतिहास हो तुम।

इतिहास का फड़क्ता वो पन्ना हो तुम, जो कभी पूरी ना हो सके, वो तमन्ना हो तुम। रगों में बेहते लहू का वो कतरा हो तुम, सिमटे तो पास, बहे तो नाश, वो खतरा हो तुम। देह में सिमटती आग

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“इश्क”, ‘एकतरफा वाला’

“इश्क की दुनिया में महफूज सा हो गया हूँ, इस दुनिया की चकाचौंध में मशगूल सा हो गया हूँ, खुदा ना खास्ता मुलाकात हो गई तन्हाई से, फीके फीके लफ्जों से बयां किया इश्क उसने।”   _____(1) “सुबह का सच होने

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